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जातियों की संख्या इतनी अधिक है कि बिना किसी विशेष सहायता के एक सामान्य व्यक्ति के लिए उनकी एक पूरी सूची बना लेना आसान नहीं है । 1935 में भारत सरकार ने इस प्रकार की एक सूची तैयार की थी । वह 1935 के ही गवर्मेंट ऑफ इंडिया एक्ट के अधीन निकाले गए "ऑर्डर इन काउंसिल" (आज्ञापत्र) के साथ संलग्न है।यह लंबी सूची 9 भागों में विभक्त है एक भाग का संबंध एक प्रांत से है और उसमें उस प्रांत की उपजातियों, नस्लों, कबीलों अथवा उन समूहों की गणना की गई, जो सारे प्रांत अथवा उसके एक हिस्से में अछूत माने जाते हैं । यह सूची विस्तृत और प्रमाणित अथवा प्राधिकृत कही जा सकती है। इस बात को स्पष्ट करने के लिए हिंदू लोग जातियों की कितनी बड़ी संख्या को वंशानुगत या जन्मजात अछूत मानते हैं, मैं "ऑर्डर इन काउंसिल" की वह सूची यहां दे रहा हूं :--

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