सम्पूर्ण वांग्मय 14th में डॉ. बाबासाहेब डॉक्टर अंबेडकर ने कहा कि यह मेरी पुस्तक The Shudra - हू दे वर एंड हाउ दे केम टु बी दि फोर्थ वर्ण ऑफ इंडो आर्यन सोसायटी, जिसका प्रकाशन 1946 में हुआ था । अंतः परिणाम है । शूद्रों के अतिरिक्त हिंदू सभ्यता ने तीन और वर्णों को जन्म दिया । इसके अतिरिक्त किसी और वर्ग के अस्तित्व की ओर वांछित ध्यान नहीं दिया गया है। यह वर्ग हैं :-- 1. जरायम पेशेवर कबीले, जिनकी संख्या लगभग 2 करोड़ है। 2. आदिम जातियां, जिनकी संख्या लगभग डेढ़ करोड़ है। 3. अछूत जातियां जिनकी संख्या लगभग 5 करोड़ है। बाबासाहेब आगे कहते हैं इन वर्गों का अस्तित्व एक कलंक है। इन सामाजिक सृष्टियों के संदर्भ में यदि हिंदू समाज को मापा जाए तो इसे कोई सभ्य समाज नहीं कह सकता। मानवता का उत्पीड़न और दमन करने के लिए इसका यह एक पैशाचिक धुर्तता है नाम उसका तो कलंक होना चाहिए। उस सभ्यता को और क्या नाम दिया जाए जिसने ऐसे समाज को जन्म दिया हो, जिसे अपने भरण पोषण के लिए अपराध करने की मान्यता प्राप्त हो। एक अन्य वर्ग को सभ्यता के नाम पर आदि काल से ही बर्...